रंगोली फिएस्टा 3.0: रंगों और रचनात्मकता के संग समाजसेवा का संदेश..तीन दिवसीय आयोजन में बच्चों और बड़ों ने सीखी रंगोली कला की बारीकियां,
बिलासपुर – भारतीय पारंपरिक कला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के साथ समाजसेवा की भावना को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से बिलासपुर में रंगोली फिएस्टा 3.0 का आयोजन किया गया। बिलासपुर लेडीज सर्कल 144 एवं बिलासपुर राउंड टेबल 283 के संयुक्त तत्वावधान में 21 से 23 अक्टूबर तक आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया। आयोजन में रंगों और रचनात्मकता के जरिए भारतीय कला की खूबसूरती को सामने लाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पारंपरिक रंगोली कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाना, लोगों में रचनात्मकता को बढ़ावा देना और कला को समाजसेवा से जोड़ना था। आयोजन के दौरान बच्चों से लेकर बड़ों तक को रंगोली बनाने की विभिन्न तकनीकों और उसकी बारीकियों को समझने का अवसर मिला।

प्रसिद्ध कलाकार ने सिखाए रंगोली के गुरु
रंगोली फिएस्टा 3.0 में महाराष्ट्र के नासिक जिले के मालेगांव से प्रसिद्ध रंगोली कलाकार प्रमोद सदाशिव आर्वी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। उन्होंने प्रतिभागियों को रंगोली निर्माण की विभिन्न तकनीकों, रंगों के बेहतर संयोजन और आकर्षक आकृतियां तैयार करने के तरीकों का प्रशिक्षण दिया। उनके मार्गदर्शन में प्रतिभागियों ने पारंपरिक कला के विभिन्न पहलुओं को करीब से समझा और अपनी रचनात्मक प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया।

कला, संस्कृति और समाजसेवा का संगम
बिलासपुर लेडिस सर्कल 144 की चेयरपर्सन मोनिका अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम को प्रतिभागियों और शहरवासियों का अच्छा प्रतिसाद मिला। BLC 144 एवं BRT 283 की संयुक्त पहल ने यह संदेश दिया कि कला केवल सौंदर्य और मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देने का प्रभावी जरिया भी बन सकती है।आयोजन के समापन पर आयोजकों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी प्रतिभागियों, अतिथियों, सहयोगियों और शहरवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही भविष्य में भी कला, संस्कृति और समाजसेवा से जुड़े रचनात्मक एवं समाजोपयोगी कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया। रंगोली फिएस्टा 3.0 ने पारंपरिक कला को प्रोत्साहित करने के साथ शहर में रचनात्मकता, सहभागिता और सामाजिक सरोकारों को एक मंच पर लाने की पहल की।

