अपने त्याग और बलिदान के लिए सही अर्थों में ‘हिन्द की चादर’ कहलाने वाले गुरु तेग बहादुर जी का आज 400वं प्रकाश पर्व.. कोविड प्रोटोकॉल में सोशल मीडिया के माध्यम संगत ने की उनकी शहादत को याद..

0
Screenshot_20210501-123345_Google
Spread the love

बिलासपुर – देश भर में आज सिखों के नौवें गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी का 400वां प्रकाश पर्व मनाया जा रहा है। कोरोना के चलते गुरुद्वारों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। … इस दिन गुरु साहिब के इतिहास और शहादत के बारे में बताया जाता है।
अपने धर्म, मानवीय मूल्यों, आदर्शों एवं सिद्धांत की रक्षा के लिए विश्व इतिहास में जिन लोगों ने प्राणों की आहुति दी, उनमें गुरु तेग बहादुर साहब का स्थान अग्रिम पंक्ति में हैं।
अमृतसर में जन्मे गुरु तेग बहादुर गुरु हरगोविन्द जी के पांचवें पुत्र थे। 8वें गुरु हरिकृष्ण राय जी के निधन के बाद इन्हें 9वां गुरु बनाया गया था। इन्होंने आनन्दपुर साहिब का निर्माण कराया और ये वहीं रहने लगे थे। गुरु तेग बहादुर बचपन से ही बहादुर, निर्भीक स्वभाव के और आध्यात्मिक रुचि वाले थे। मात्र 14 वर्ष की आयु में अपने पिता के साथ मुगलों के हमले के खिलाफ हुए युद्ध में उन्होंने अपनी वीरता का परिचय दिया। इस वीरता से प्रभावित होकर उनके पिता ने उनका नाम तेग बहादुर यानी तलवार के धनी रख दिया
।उन्होंने मुगल शासक औरंगजेब की तमाम कोशिशों के बावजूद इस्लाम धारण नहीं किया और तमाम जुल्मों का पूरी दृढ़ता से सामना किया। औरंगजेब ने उन्हें इस्लाम कबूल करने को कहा तो गुरु साहब ने कहा शीश कटा सकते हैं केश नहीं।
औरंगजेब ने गुरुजी पर अनेक अत्याचार किए, परंतु वे अविचलित रहे। वह लगातार हिन्दुओं, सिखों, कश्मीरी पंडितों और गैर मुस्लिमों का इस्लाम में जबरन धर्मांतरण का विरोध रहे थे जिससे औरंगजेब खासा नाराज था।

आठ दिनों की यातना के बाद गुरुजी को दिल्ली के चांदनी चौक में शीश काटकर शहीद कर दिया गया। उनके शहीदी स्थल पर गुरुद्वारा बनाया गया जिसे गुरुद्वारा शीशगंज साहब नाम से जाना जाता है।

– अपने त्याग और बलिदान के लिए वह सही अर्थों में ‘हिन्द की चादर’ कहलाए।
और उनकी इसी याद में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश भर के सिक्ख भाइयो ने मत्था टेका

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts