बिलासपुर में घायल हुई बाघिन को इलाज के बाद क्या उसके पुराने रहवास में छोड़ दिया जाएगा?. सवाल ये भी की बाघिन घायल कैसे हुई? जंगल महकमा तफ्तीश में कि अचानकमार में और कौन से जानवरो के है पदचाप ? ताकि टाइगर रिजर्व में नई सम्भवनाओ को तलाशा जा सके.
बिलासपुर संभाग के अचानकमार टाइगर रिजर्व मार्ग में घायल बाघिन के मिलने के बाद लगातार जहाँ सभी की निगाहें बाघिन के स्वास्थय पर टिकी है तो वही सवाल ये भी उठ रहे है कि क्या अचानकमार टाइगर रिजर्व में बाघों की दहाड़ फिर सुनाई देगी.. बाघिन को ठीक होने में कितना समय लगेगा… ठीक होने के बाघिन को क्या उसके पुराने रहवास में छोड़ दिया जाएगा.. सवाल ये भी की बाघिन घायल कैसे हुई होगी… इन तमाम सवालों को जानने के लिए देखिए ये खास रिपोर्ट
मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व के छपरवा वन परिक्षेत्र के जंगल मे बीते दो दिन पहले बाघ को देखे जाने की सुगबुगाहट पर उस वक़्त विराम लग गया जब ग्रामीणों के जरिये जंगल विभाग को जानकारी मिली की अचानकमार टाइगर रिजर्व में एक बाघिन घायल अवस्था मे पड़ी है…इस खबर के मिलते ही कानन पेंडारी बिलासपुर व रायपुर के डॉक्टर की टीम के साथ जंगल मे बाघ की तलाश में वन अमला वहाँ पर पहुचा जहाँ बाघिन पड़ी हुई थी.. जुटी थी…. मौके पर पहुँची टीम को बाघ के शरीर के पिछले हिस्से व पैर में चोट दिखाई दिए…जिसके बाद टीम ने घायल बाघ को ट्रेंकुलाइज किया औऱ केज में डालकर घायल बाघ को बिलासपुर के कानन पेंडारी जु ले कर आये… एटीआर के उपसंचालक डीएफओ सत्यदेव शर्मा के मुताबिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम घायल बाघ का उपचार कर रही है ..चूंकि जहाँ पर चोट लगी थी उसने कीड़े लग गए थे इस वजह से रेस्क्यू सेंटर में उसका इलाज किया जाना जरूरी है
बीते दो दिनों से घायल बाघिन का उपचार बिलासपुर के कानन पेंडारी में जारी है… कानन पेंडारी के डी एफ ओ कुमार निशांत के मुताबिक डॉक्टरों की टीम और विभाग की टीम लगातर उसके स्वास्थ्य को लेकर निगरानी कर रही है… कल उसे भोजन भी दिया गया.. ये तमाम संकेत है कि बाघिन अब खतरे से बाहर है और उसके स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है.. हालांकि उसके स्वास्थ्य में सुधार होने में अभी 15 दिनों का समय लगेगा उसके बाद उच्च अधिकारी निर्णय करेंगे कि बाघिन को जंगल मे छोड़ना है या फिर जू में ही रखना है… जंगल विभाग ये कोशिश कर रहा है कि उसे वापिस उसके इलाके में छोड़ दिया जाए
कानन पेंडारी के अधिकारियो की माने तो अचानकमार में मिली बाघिन का ये वही इलाका है इसस अधिकारी सहमत नही है उनका मानना है कि चूंकि अचानक मार से कान्हा नेशनल पार्क और बांधवगढ़ की सीमाएं लगी है इसलिए हो सकता है कि शिकार की तलाश में बाघिन इधर आ गयी हो.. शिकार की आशंका को अधिकारी सिरे से खारिज कर रहे है..
बहरहाल घायल बाघिन के अचानकमार में मिलने से वन्य जीव की देखरेख करने वाला जंगल विभाग का महकमा अब इस बात की तफ्तीश में जुट गया है कि अचानकमार में और कौन से जानवरो पदचाप है ताकि टाइगर रिजर्व में नई सम्भवनाओ को तलाशा जा सके…
राजा मनीष मनसागर
