15 फरवरी से फास्टैग अनिवार्य फोर व्हीलर में फास्टैग के लिए 15 फरवरी तक ही छूट, इसके बाद लगेगा दोगुना टोल

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बिलासपुर- लॉकडाउन समाप्त होने और कोरोना वैक्सीनेशन की तैयारी के साथ ही पुराने नियमों पर कार्रवाई फिर शुरू कर दी गई है। टोल नाकों से गुजरने के लिए वाहनों में फास्टैग 1 जनवरी से अनिवार्य किया गया था, लेकिन अब यह तारीख बढ़ाकर 15 फरवरी की गई है। एजेंसियों ने साफ किया है कि इस तारीख के बाद गाड़ियों में फास्टैग नहीं होने पर कैश लाइन में दोगुना टोल वसूला जाएगा।

हालांकि यह नियम देशभर में लागू किया जाने वाला है। अभी फास्टैग लाइन और कैश लाइन, दोनों का ही शुल्क समान है। जैसे, शहर के नजदीक रसनी टोल नाके में अभी कार का शुल्क 25 रुपए है। फास्टैग नहीं होने पर 16 फरवरी से कैश लाइन पर 50 रुपए शुल्क लिया जाएगा। गौरतलब है, सरकार टोल शुल्क में डिजिटल और आईटी आधारित पेमेंट को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इन नियमों की अनिवार्यता पर जोर दे रही है। सरकार ने केंद्रीय मोटर वाहन नियम (सीएमवीआर)1989 में संशोधन कर 15 फरवरी की नई तारीख तय की है। यही नहीं, थर्ड पार्टी इंश्योरेंस लेने की दशा में भी फास्टैग आईडी की जरूरत पड़ेगी। अफसरों के मुताबिक फास्टैग फिट होने के बाद ही ट्रांसपोर्ट वाहनों के लिए फिटनेस सर्टीफिकेट का रिनीवल होगा। नेशनल परमिट व्हीकल्स (एनपीवी) के लिए फास्टैग की अनिवार्यता 1 अक्टूबर 2019 से शुरु की गई है। फास्टैग स्टिकर को ऑफलाइन या ऑनलाइन खरीदा जा सकता है। इसके लिए बैंकों की फास्टैग एप्लिकेशन वेबसाइट पर डीटेल देनी होती है। फास्टैग अकाउंट बन जाने के बाद इसे मोबाइल एप से भी कंट्रोल कर सकते हैं।

ऐसे काम करता है फास्टैग : गाड़ी पर फास्टैग लगा हो तो टोल प्लाजा पर लंबी लाइन से छुटकारा मिलता है और समय भी बचता है। यह ऑटोमेटिक पेमेंट मोड है। फास्टैग एक रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन टैग है। यह गाड़ी के विंडस्क्रीन पर लगाया जाता है और बैंक अकाउंट या नैशनल हाईवे के पेमेंट वॉलेट से लिंक रहता है। गाड़ी जैसे ही नाके पर पहुंचती है, वहां लगे सेंसर आइडेंटिफाई कर लेते हैं और शुल्क काट लेते हैं

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